पाकिस्तान की अजीबोगरीब लोकतंत्र का आम चुनाव- 8 फरवरी 2024

8 फरवरी 2024, इस दिन पाकिस्तान में आम चुनाव हो चुके हैं। कहां जाता है कि पाकिस्तान एक ऐसी सेना है जिसके पास अपना एक देश है। दुनिया के तमाम देशों के पास एक सेना होती है जो उसके सीमाओं की सुरक्षा करती है लेकिन पाकिस्तान में स्थिति अजीबोगरीब है। इस बात से ही पता चलता है कि वहां की राजनीति, सरकार और आवो- हवा में सेवा का वर्चस्व बहुत अधिक है। हालांकि वर्ष 2024 में भारत में भी आम चुनाव होने हैं, फिर पाकिस्तान तो भारत से ही टूटकर अलग हुआ है इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान में आम चुनाव कैसे कराए जाते हैं और फिर इसके नतीजे भारत को कहीं ना कहीं तो प्रभावित करेंगे ही।

पाकिस्तान में चुनावी प्रक्रिया क्या है

15 दिसंबर 2023 को पाकिस्तान के निर्वाचन आयोग ने 8 फरवरी 2024 को पूरे देश में एक ही दिन में चुनाव कराने की घोषणा की थी। यह पाकिस्तान के अजीबोगरीब लोकतांत्रिक इतिहास का 12वां आम चुनाव है। मजे की बात है कि 11 दफा आम चुनाव हो चुके हैं जिसमें 30 बार प्रधानमंत्री के पद पर लोग बैठ चुके हैं और किसी ने भी अपने 5 साल के कार्यकाल को कभी पूरा नहीं किया। पाकिस्तान की चुनावी व्यवस्था संसदीय लोकतंत्र के आधार पर होती है। वहां दो सदन है पहला, निम्न सदन जिसे कौमी असेंबली कहा जाता है जैसे भारत की लोकसभा है और दूसरा उच्च सदन जिसे आइवान – ए- बाला जैसे भारत की राज्यसभा है। प्रधानमंत्री तय होगा वह होगा कौमी असेंबली के चुनाव से। यह चुनाव पाकिस्तान के कौमी असेंबली का चुनाव यानी प्रधानमंत्री का चुनाव है। 128,585,760 (तकरीबन 12 मिलियन) पाकिस्तानी जनता जो वोट करने की न्यूनतम आयु 18 वर्ष के ऊपर है ,वोट करेगी। कुल सीट 336 है जिसमें से 266 सीट पर मतदान होने हैं। बाकी बचे 60 सीट महिलाओं और 10 सीट गैर मुस्लिम यानी अल्पसंख्यक के लिए आरक्षित है। यानी की 70 सीटों पर सीधे चुनाव नहीं होंगे। चुनाव वैलेट पेपर आधारित है ,EVM पर चुनाव नहीं हो रहा है। बैलट पेपर आधारित चुनाव में कुछ समस्याएं आती हैं जैसे बूथ कैपचरिंग और कुछ संवेदनशील इलाकों में ऐसी घटनाएं देखने को मिलते भी है। मतदान एक ही दिन में सुबह से शुरू होकर शाम तक अंत हो जाता है, 24 घंटे के अंदर कुल आंकड़े आ जाते हैं और कुल गिनती पता चल जाती है। जिस भी पार्टी के सदस्यों को नेशनल असेंबली में सर्वाधिक मत प्राप्त होता है, उसे पार्टी का प्रधानमंत्री उम्मीदवार प्रधानमंत्री बनता है।

कैसे बनती है सरकार

कुल सीट 336 है जिस पर 266 पर मतदान देश भर में किया जाता है। शेष 60 सीट महिला और 10 सीट गैर मुस्लिम यानी अल्पसंख्यक के लिए आरक्षित है। सरकार बनाने के लिए 336 में से 169 सीट की जरूरत होती है। नेशनल असेंबली में जो भी मेंबर बने जिन्होंने चुनाव जीता, उसके बाद जिस पार्टी के सदस्यों कि संख्या ज्यादा है उन 266 सीटों पर ,उनको उसी अनुपात में इन 70 सीटों पर अपने सदस्यों को बैठाने का मौका मिलेगा। इस प्रकार जब कुल 336 सीटों पर सदस्य पूरे हो जाएंगे तब, कम से कम 169 लोग अपनी सहमति जिस भी पार्टी को देंगे उसे पार्टी का प्रधानमंत्री बनेगा और वह अपना मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकता है। यह गौर करने वाली बात है कि वहां के संविधान में ऐसा लिखा है कि कोई भी गैर मुस्लिम पाकिस्तान का प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति नहीं बन सकता है।

पाकिस्तान की बड़ी पार्टियों और बड़े खिलाड़ी कौन-कौन हैं

पाकिस्तान मुस्लिम लीग -नवाज़ (PMLN), पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी। नवाज शरीफ दो बार प्रधानमंत्री(2007,2013) रह चुके हैं। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) जिसके मुखिया है पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान जो अभी जेल में बंद है और वर्तमान में इस पार्टी की बागडोर गोहर अली के हाथ में है। इमरान खान वर्ष 2018 -22 में प्रधानमंत्री रह चुके हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) जिसके मुखिया हैं बिलावल भुट्टो जरदारी जो बेनजीर भुट्टो के पुत्र हैं। आमतौर पर देखा गया है कि बिलावल भुट्टो ज्यादा प्रभावित नहीं है। अवामी नेशनल पार्टी (ANP) एक जातीय पश्तून पार्टी है जो कहीं ना कहीं अपने अस्तित्व को बचाए रखने की कोशिश में लगी है। यह तो हो गई वहां की राजनीतिक पार्टियों की चर्चा अब चर्चा करते हैं वहां के सबसे बड़े खिलाड़ी की और वह है वहां की सेना और सेना प्रमुख। इमरान खान जिसको पाकिस्तानी सेना का लाडला कहा जाता रहा है, हालांकि शुरुआत में नवाज शरीफ भी पाकिस्तानी सेना के चाहते थे लेकिन बाद में कुछ मुद्दों पर टकराव हो गई। फ़िर सेना ने इमरान खान को खड़ा किया ताकि वह पाकिस्तानी सेना को सहयोग करें और सेना इमरान खान को। शुरुआत में सब ठीक रहा लेकिन बाद में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की भलाई के लिए इनका टकराव सेना के नज़रिए और निर्णय से हो ही गया जो सेना के खिलाफ जाता हुआ दिखने लगा। फिर सेना को इनसे भी दिक्कत हुई और अभी वह जेल में है। फिर से नवाज़ शरीफ़ को सेना का सहयोग मिलता हुआ दिख रहा है। वर्तमान में पाकिस्तानी सेना के प्रमुख हैं जनरल असीम मुनीर। सीधे तौर पर राजनीति से दूर है लेकिन इनकी राजनीतिक संबंध और राजनीतिक पकड़ बहुत मजबूत है। कभी-कभी नेता की तरह अपनी बात चलते हैं। चूंकी पाकिस्तान में वहां की सेना उद्योग धंधे भी चलती है, ताकि सेना को किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़े। इसलिए देश के अंदर सेना बहुत मजबूत है और सेना प्रमुख भी। सेना प्रमुख अपनी राजनीतिक पकड़ का इस्तेमाल इस चुनाव में कर सकते हैं।

पाकिस्तान के 75 वर्षों के लोकतंत्र का अजीबोगरीब चुनावी इतिहास

पाकिस्तान में अब तक तीन बार संविधान आ चुका है (वर्ष 1956 ,1962 और 1973 में) । हमारे देश भारत में यह एक ही बार आया है और एक ही बार लागू हुआ है 26 जनवरी 1950 को, जिसमें समय-समय पर जरूरत के अनुसार संशोधन होते रहे हैं। पाकिस्तान में राजनीतिक स्थिरता नहीं होने के कारण वर्ष 1958 में जनरल मोहम्मद अयूब खान ने तख्ता पलट कर दिया था और सेना ने सत्ता का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था। वर्ष 1970 में पहला आम चुनाव हुआ था वह भी इसलिए हुआ था क्योंकि वर्ष 1965 में पाकिस्तान सेना को भारत ने हराया था और पाकिस्तानी सेना उस समय कमजोर स्थिति में थी। वर्ष 1977 में प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो थे लेकिन उन पर भी आरोप लगे की उन्होंने चुनाव को गलत तरीके से जीतने की कोशिश की और जीत गए। इन आरोपों के कारण उस समय के सेना प्रमुख जनरल जिया -उल हक ने ऑपरेशन फेयर प्ले शुरू किया और सरकार का तख्ता पलट कर दिया। वर्ष 1999 में प्रवेश मुशर्रफ ने फिर तख्ता पलट किया उस समय प्रधानमंत्री थे नवाज शरीफ इन्होंने मुशर्रफ को रोकने की काफी कोशिश की लेकिन असफल रहे। परवेज मुशर्रफ ने फिर कारगिल युद्ध की नींव रखी और भारतीय सेना ने इनको हार का स्वाद चखाया।

यह लेख लिखने तक ,आ रहे आंकड़ों पर नजर डालें तो नवाज शरीफ समर्थित पाकिस्तान मुस्लिम लीग -नवाज़ (PMLN) पार्टी सरकार बनाती हुई दिख रही है।

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